Skip to main content

विनायक सावरकर -समरसता व हिंदुत्व के पुरोधा

 “मैं तुम्हारे दर्शन करने आया हूँ मदन, मुझे तुम पर गर्व है. सावरकर तुम्हें मेरी आँखों में डर की परछाई तो नहीं दिखाई दे रही, बिल्कुल नहीं मुझे तुम्हारे चेहरे पर योगेश्वर कृष्ण का तेज दिखाई दे रहा है, तुमने गीता के स्थितप्रज्ञ को साकार कर दिया है मदन”. न जाने ऐसे कितने ही जीवन हैं जो सावरकर से प्रेरणा प्राप्त कर मातृभूमि के लिए हंसते हंसते बलिदान हो गए. महापुरुषों का स्मरण व सदैव उनके गुणों को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ते रहना, यही भारत की श्रेष्ठ परंपरा है. ऐसे ही अकल्पनीय व अनुकरणीय जीवन को याद करने का दिन है सावरकर जयंती.

यहां दीप नहीं जीवन जलते है 


विनायक दामोदर सावरकर केवल नाम नहीं, एक प्रेरणा पुंज है जो आज भी देशभक्ति के पथ पर चलने वाले मतवालों के लिए जितने प्रासंगिक हैं, उतने ही  प्रेरणादायी भी. वीर सावरकर अदम्य साहस, इस मातृभूमि के प्रति निश्छल प्रेम करने वाले व स्वाधीनता के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाला अविस्मरणीय नाम है. इंग्लैंड में भारतीय स्वाधीनता हेतु अथक प्रवास, बंदी होने पर भी अथाह समुद्र में छलांग लगाने का अनोखा साहस, कोल्हू में बैल की भांति जोते जाने पर भी प्रसन्नता, देश के लिए परिवार की भी बाजी लगा देना, पल -प्रतिपल देश की स्वाधीनता का चिंतन व  मनन, अपनी लेखनी के माध्यम से आमजन में देशभक्ति के प्राण का संचार करना, ऐसा अदभुत व्यक्तित्व था विनायक सावरकर का. सावरकर ने अपने नजरबंदी समय में अंग्रेजी व मराठी में अनेक मौलिक ग्रंथों की रचना की, जिसमें मैजिनी, 1857  स्वातंत्र्य समर, मेरी कारावास कहानी, हिंदुत्व आदि प्रमुख हैं.

सर्वत्र प्रथम कीर्तिमान रचने वाले सावरकर

सावरकर दुनिया के अकेले स्वातंत्र्य योद्धा थे, जिन्हें दो-दो आजीवन कारावास की सजा मिली. सजा को पूरा किया और फिर से राष्ट्र जीवन में सक्रिय हो गए. वे विश्व के ऐसे पहले लेखक थे, जिनकी कृति 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को दो-दो देशों ने प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया. सावरकर पहले ऐसे भारतीय राजनीतिज्ञ थे, जिन्होंने सर्वप्रथम विदेशी वस्त्रों की होली जलाई. वे पहले स्नातक थे, जिनकी स्नातक की उपाधि को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण अंग्रेज सरकार ने वापस ले लिया. वीर सावरकर पहले ऐसे भारतीय विद्यार्थी थे, जिन्होंने इंग्लैंड के राजा के प्रति वफादारी की शपथ लेने से मना कर दिया. फलस्वरूप उन्हें वकालत करने से रोक दिया गया. वीर सावरकर ने राष्ट्र ध्वज तिरंगे के बीच में धर्म चक्र लगाने का सुझाव सर्वप्रथम दिया था, जिसे तात्कालिक  राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने माना. उन्होंने ही सबसे पहले पूर्ण स्वतंत्रता को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का लक्ष्य घोषित किया. वे ऐसे प्रथम राजनैतिक बंदी थे, जिन्हें विदेशी (फ्रांस) भूमि पर बंदी बनाने के कारण हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मामला पहुँचा. वे पहले क्रांतिकारी थे, जिन्होंने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास का चिंतन किया तथा बंदी जीवन समाप्त होते ही जिन्होंने अस्पृश्यता आदि कुरीतियों के विरुद्ध आंदोलन शुरू किया. दुनिया के वे ऐसे पहले कवि थे, जिन्होंने अंदमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कील और कोयले से कविताएँ लिखीं और फिर उन्हें याद किया. इस प्रकार याद की हुई दस हजार पंक्तियों को उन्होंने जेल से छूटने के बाद पुन: लिखा.

काल कोठरी के ग्यारह साल व सावरकर

क्या मैं अब अपनी प्यारी मातृभूमि के पुनः दर्शन कर सकूंगा ? 04 जुलाई 1911 को अंदमान की सेलुलर जेल में पहुँचने से पहले सावरकर के मन की व्यथा शायद कुछ ऐसी ही रही होगी. अंदमान की उस काल कोठरी में सावरकर को न जाने कितनी ही शारीरिक यातनाएं सहनी पड़ी होंगी, इसको  शब्दों में बता पाना असंभव है. अनेक वर्षो तक रस्सी कूटने, कोल्हू में बैल की तरह जुत कर तेल निकालना, हाथों में हथकड़ियां पहने हुए घंटों टंगे रहना, महीनों एकांत काल-कोठरी में रहना और भी न जाने किस -किस प्रकार के असहनीय कष्ट झेलने पड़े होंगे सावरकर को. लेकिन ये शारीरिक कष्ट भी कभी उस अदम्य साहस के पर्याय बन चुके विनायक सावरकर को प्रभावित न कर सके. कारावास में रहते हुए भी सावरकर सदा सक्रिय बने रहे. कभी वो राजबंदियों के विषय में निरंतर आंदोलन करते, कभी पत्र द्वारा अपने भाई को आंदोलन की प्रेरणा देते, कभी अपनी सजाएँ समाप्त कर स्वदेश लौटने वाले क्रांतिवीरों को अपनी कविताएं व संदेश कंठस्थ करवाते. इस प्रकार सावरकर सदैव अपने कर्तव्यपथ पर अग्रसर दिखाई दिए. उनकी अनेक कविताएं व लेख अंदमान की उन दीवारों को लांघ कर 600 मील की दूरी पार करके भारत पहुँचते रहे और समाचार पत्रों द्वारा जनता में देशभक्ति की अलख जगाते  रहे.

समरसता व हिंदुत्व के पुरोधा

सन् 1921 में सावरकर को अंदमान से कलकत्ता लाना पड़ा. वहां उन्हें रत्नागिरी जेल भेज दिया गया. 1924 में सावरकर को जेल से मुक्त कर रत्नागिरी में ही स्थानबद्ध कर दिया गया. उन्हें केवल रत्नागिरी में ही घूमने -फिरने की स्वतंत्रता थी. इसी समय  में सावरकर ने हिंदू संगठन व समरसता का कार्य प्रारम्भ कर दिया. महाराष्ट्र के इस प्रदेश में छुआछूत को लेकर घूम – घूमकर विभिन्न स्थानों पर व्याख्यान देकर धार्मिक, सामाजिक तथा राजनैतिक दृष्टि से छुआछूत को हटाने की आवश्यकता बतलाई. सावरकर के प्रेरणादायी व्याख्यान व तर्कपूर्ण दलीलों से लोग इस आंदोलन में उनके साथ हो लिए.  दलितों में अपने को हीन समझने की भावना धीरे-धीरे जाती रही और वो भी इस समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है, ऐसा गर्व का भाव जागृत होना शुरू हो गया. सावरकर की प्रेरणा से भागोजी नामक एक व्यक्ति ने ढाई लाख रूपए व्यय करके रत्नागिरी में ‘श्री पतित पावन मंदिर’ का निर्माण करवाया. दूसरी और सावरकर ने ईसाई पादरियों और मुसलमानों द्वारा भोले भाले हिंदुओं को बहकाकर किये जा रहे धर्मांतरण के विरोध में शुद्धि आंदोलन प्रारम्भ कर दिया. रत्नागिरी में उन्होंने लगभग 350 धर्म – भ्रष्ट  हिंदुओं को पुनः हिंदू धर्म में दीक्षित किया.

युवाओं के सावरकर

सावरकर का जीवन आज भी युवाओं में प्रेरणा भर देता है. जिसे सुनकर प्रत्येक देशभक्त युवा के रोंगटे खड़े हो जाते है. विनायक की वाणी में प्रेरक ऊर्जा थी. उसमें दूसरों का जीवन बदलने की शक्ति थी. सावरकर से शिक्षा- दीक्षा पाकर अनेकों युवा व्यायामशाला जाने लगे,  पुस्तकें पढ़ने लगे. विनायक के विचारों से प्रभावित असंख्य युवाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया. जो भोग – विलासी थे, वे त्यागी बन गए. जो उदास तथा आलसी थे, वे उद्यमी हो  गए. जो संकुचित और स्वार्थी थे, वो परोपकारी हो गए. जो केवल अपने परिवार में डूबे हुए थे, वे देश-धर्म के संबंध में विचार करने लगे. इस प्रकार हम कह सकते है कि युवाओं के लिए सावरकर वो पारस पत्थर थे, जो भी उनके संपर्क में आया वो ही इस मातृभूमि की सेवा में लग गया.

Comments

Popular posts from this blog

EPFO ; Employees Provident Fund Organization

 इम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) के लाभार्थियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। EPFO ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए इंटरेस्ट जमा करने की प्रोसेस शुरू कर दी है। जिसके बाद अब जल्द ही EPFO के 7 करोड़ सब्सक्राइबर्स के अकाउंट में इंटरेस्ट का पैसा रिफ्लेक्ट होना शुरू हो जाएगा। इस बात की जानकारी EPFO ने हाल ही में ट्वीट कर दी है। इसी साल मार्च में EPFO ने 8.1% इंटरेस्ट रेट का ऐलान किया था, जो पिछले 40 सालों में सबसे कम ब्याज दर है। इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप किस तरह अपने PF अकाउंट में आए इंटरेस्ट को चेक कर सकते हैं। वेबसाइट पर कैसे चेक करें अपना अकाउंट बैलेंस ? सब्सक्राइबर सबसे पहले EPFO की ऑफिशियल वेबसाइट epfindia.gov.in पर जाएं। अब सर्विस टैब पर जाएं। यहां आपको 'For Employees' सर्च और सिलेक्ट करना है। यहां से आप नए पेज पर पहुंच जाएंगे, जहां आपको 'Member Passbook' पर क्लिक करना होगा। और इसके बाद (UAN) और पासवर्ड एंटर करना होगा। पासबुक ओपन होने के बाद उसमें एम्प्लायर कंट्रीब्यूशन, इंडिविजुअल कंट्रीब्यूशन और इंटरेस्ट दिखेगा। इम्प्लॉई जो एक से ज्यादा कं...

મહાન હિન્દુ સંત શ્રી જલારામ બાપા વિશે જાણવા જેવો ઈતિહાસ

 જન્મ- ૪ નવેમ્બર ૧૭૯૯ અવસાન – ૨૩ ફેબ્રુઆરી ૧૮૮૧ સંત શ્રી જલારામબાપાનો જન્મ ઇ.સ. વિક્રમ સંવત ૧૮૫૬ની કારતક સુદ સાતમે લોહાણા સમાજના ઠક્કર કુળમાં થયો હતો. તે ભગવાન રામના ભક્ત હતા. જલારામ બાપાને ગૃહસ્થ જીવન કે પોતાના પિતાનો વ્યવસાય સ્વીકરારવામાં કોઈ રસ નહોતો. તેઓ હંમેશા યાત્રાળુઓ, સંતો અને સાધુઓની સેવામાં રોકાયેલા રહેતા. તેઓ પોતાના પિતાથી છૂટા થઈ ગયા અને તેમના કાકા વાલજીભાઈએ યુવાન જલારામ અને તેમની માતાને પોતાને ઘેર રહેવા સૂચવ્યું. ૧૮૧૬ની સાલમાં ૧૬ વર્ષની ઊંમરે તેમના લગ્ન આટકોટના પ્રાગજીભાઈ ઠક્કરની પુત્રી વીરબાઈ સાથે કરવામાં આવ્યાં. વીરબાઈ પણ ધાર્મિક અને સંતઆત્મા હતા આથી તેમણે પણ જલારામ બાપા સાથે સંસારીવૃત્તિઓથી વિરક્ત રહી ગરીબો અને જરૂરિયાતમંદોની સેવાના કાર્યમાં ઝંપલાવી દીધું. વીસ વર્ષની વયે જલારામે આયોધ્યા, કાશી અને બદ્રીનાથની જાત્રાએ જવાનું નક્કી કર્યું ત્યારે પત્નિ વીરબાઈ પણ તેમની સાથે જોડાયા. ૧૮ વર્ષની ઉંમરે તેઓ ગુજરાતના ફતેહપુરના ભોજા ભગતના અનુયાયી બન્યા. ભોજા ભગતે તેમને “ગુરુ મંત્ર”, માળા અને શ્રી રામનું નામ આપ્યું. તેમના ગુરુના આશીર્વાદથી તેમણે ‘સદાવ્રત’ની શરૂઆત કરી. સદાવ...

केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ ?, दो मिनट की ये कहानी रौंगटे खड़े कर देगी

 केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ ?, दो मिनट की ये कहानी रौंगटे खड़े कर देगी " एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ का मार्ग पूछ लेता। मन में भगवान शिव का ध्यान करता रहता। चलते चलते उसको महीनो बीत गए।* *आखिरकार एक दिन वह केदार धाम पहुच ही गया। केदारनाथ में मंदिर के द्वार 6 महीने खुलते है और 6 महीने बंद रहते है। वह उस समय पर पहुचा जब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे। पंडित जी को उसने बताया वह बहुत दूर से महीनो की यात्रा करके आया है। पंडित जी से प्रार्थना की - कृपा कर के दरवाजे खोलकर प्रभु के दर्शन करवा दीजिये । लेकिन वहां का तो नियम है एक बार बंद तो बंद। नियम तो नियम होता है। वह बहुत रोया। बार-बार भगवन शिव को याद किया कि प्रभु बस एक बार दर्शन करा दो। वह प्रार्थना कर रहा था सभी से, लेकिन किसी ने भी नही सुनी। पंडित जी बोले अब यहाँ 6 महीने बाद आना, 6 महीने बाद यहा के दरवाजे खुलेंगे। यहाँ 6 महीने बर्फ और ढंड पड़ती है। और सभी जन वहा से चले गये। वह वही पर रोता रहा। र...

અક્ષૌહિણી સેના

પ્રાચીન ભારતમાં અક્ષૌહિણી એક સૈન્ય તરીકે ગણાય છે. મહાભારતના એ ધર્મયુદ્ધમાં અઢાર અક્ષૌહિણી સેનાનો નાશ થયો હતો. મહાભારતના યુધ્ધમાં સૈન્યમાં મનુષ્યોની સંખ્યા ઓછામાં ઓછી ૪૬૮૧૯૨૦ હતી  ઘોડાઓની સંખ્યા ૨૭૧૫૬૨૦ હતી  આમ્ર આય્લીજ સંખ્યામાં હાથીઓ હતાં  આ સંખ્યાથી તો એખ્યલ આવુજ ગયો હશે ને કે મહાભારતનું કુરુક્ષેત્રનું યુદ્ધ  કેટલું ભયંકર અને વિનાશકારી હતું ! મહાભારત મુજબ,  કુરુક્ષેત્રના યુદ્ધમાં કુલ ૧૮ અક્ષૌહિણી સેનાઓએ યુદ્ધમાં ભાગ લીધો હતો  આ પૈકી, ૧૧ અક્ષૌહિણી સેના કૌરવોના પક્ષમાં હતી  જ્યારે ૭ અક્ષૌહિણી સેના પંડવોની તરફેણમાં લડી હતી  અક્ષૌહિણી સેનામાં કેટલા રથ, હાથી, પાયદળ અને અને ઘોડા હોય છે  આના સંબંધમાં મહાભારતના પર્વસંગ્રાહના પર્વનાં દ્વિતીય અધ્યાયમાં આનું વિસ્તારપૂર્વક વર્ણન કરવામાં આવ્યું છે  એ માહિતી આજે હું તમને આપવાં માંગુ છું   અક્ષૌહિણી સેના  " અક્ષૌહિણી હિ સેના સા તદા યૌધિષ્ઠીરં બલમ ।  પ્રવિશ્યાન્તદર્ઘે રાજન્સાગરં કુનદી યથા ॥  વિભાગ  કોઇપણ અક્ષૌહિણી સેના ગજ (હાથી સવાર)  રથ (રથી) ઘોડા (ઘો...

5 રાજ્યોની વિધાનસભા ચૂંટણીના પરિણામો LIVE

  યોગી અદિત્યનાથ વહેલી સવારે પહોંચ્યા મંદિર ઉત્તરપ્રદેશ સહિતના પાંચ રાજ્યોમાં આજે વિધાનસભા ચૂંટણીના પરિણામો, UP ના મુખ્યમંત્રી યોગી અદિત્યનાથ વહેલી સવારે મંદિર પહોંચ્યા નેતાઓ ભગવાનના શરણે  ઉત્તરપ્રદેશમાં મતગણતરી અગાઉ ભાજપ નેતા રાજેશ્વર સિંઘ ચંદ્રિકા દેવી મંદિરે દર્શનાર્થે પહોંચ્યા 5 states election results Infogram

રોજગાર સમાચાર 02.03.2022

 રોજગાર સમાચાર 02.03.2022 ડાયનોસોર પાર્ક ગુજરાત

શું તમે જાણો છો કે પાળિયા મુખત્વે ૧૧ પ્રકારના હોય છે, ચાલો આજે પાળિયા ના પ્રકારો વિષે થોડું જાણીયે

 1) ખાંભી: આ પ્રકારનો પાળીયો એટલે કે કોતરકામ વગર બાંધવામાં આવેલ કોઈ મૃત વ્યક્તિનું સ્મારક જેને આપણે ખાંભી તરીકે ઓળખીયે છીએ. 2) થેસા: એક એવો પ્રકાર છે જેમાં પાળિયાની નજીકમાં નાનાં પથ્થરો ગોઠવવામાં આવે છે જેને થેસા પણ કહે છે 3) ચાગીયો: કોઈ ઘટના કે વ્યક્તિના સંભારણા તરીકે નાના મોટા પત્થરોના ઢગલા કરી ને ચાગીયો બનાવવાં આવે છે, આ પ્રકારના પાળિયા બહુ ઓછા જોવા મળે છે. 4) સુરાપુરા: અન્યના જીવન માટે યુદ્ધમાં ખપી જનાર યોદ્ધાઓ જેને આપણે સૌ કોઈ સુરાપુરા તરીકે ઓળખીયે છીએ અને એમની યાદમાં સુરાપુરાના પાળિયા બને છે. 5) સુરધન: કોઈ આબરૂદાર અને શૂરવીર વ્યક્તિનું આકસ્મિક મૃત્યુ થાય ત્યારે આવા અકસ્માતની યાદમાં બાંધવામાં આવેલા પાળિયા ને સુરધન ના પાળિયા તરીકે વર્ગીકૃત કરવામાં આવે છે. તેમાંના કેટલાક પાળિયાને સતીમાતા અથવા ઝુઝાર મસ્તિષ્ક વગરનાં યોદ્ધાઓ પણ કહેવામાં આવે છે. 6) યોદ્ધાઓના પાળિયા: આ પ્રકારના સ્મારકો અથવા પાળિયા ઓ સૌથી સામાન્ય અને ઠેર ઠેર જોવા મળતા હોય છે, યોધ્ધાઓના પાળિયા મોટે ભાગે લડાઈના નાયકોની પૂજા કરતા લોક-સમુદાય અને લોકજાતિઓ સાથે સંકળાયેલ હોય છે. તેઓ મર્યાદિત વિસ્તારમાં એકી સાથે મોટી ...

जब एक किसान गंदे कपड़े पहन थाने पहुंचा, पूरा थाना हुआ सस्पेंड.....

सन् 1979 की बात है। शाम 6 बजे एक किसान इटावा ज़िला के ऊसराहार थाने में मैला कुचैला कुर्ता धोती पहने पहुँचा और अपने बैलों की चोरी की रिपोर्ट लिखाने की बात की। छोटे दरोग़ा ने पुलिसिया अंदाज में 4 आड़े-टेढ़े सवाल पूछे और रिपोर्ट बिना लिखे ही किसान को चलता किया। जब वो किसान थाने से जाने लगा तो एक सिपाही पीछे से आया और बोला “बाबा थोड़ा खर्चा-पानी दे तो रिपोर्ट लिख दी जाएगी।” अंत में 35 रूपये की रिश्वत लेकर रिपोर्ट लिखना तय हुआ। रिपोर्ट लिख कर मुंशी ने किसान से पूछा “बाबा हस्ताक्षर करोगे कि अंगूठा लगाओगे?” किसान ने हस्ताक्षर करने को कहा तो मुंशी ने दफ़्ती आगे बढ़ा दी जिस पर प्राथमिकी का ड्राफ़्ट लिखा था। किसान ने पेन के साथ अंगूठे वाला पैड उठाया तो मुंशी सोच में पड़ गया। हस्ताक्षर करेगा तो अंगूठा लगाने की स्याही का पैड क्यों उठा रहा है? किसान ने हस्ताक्षर में नाम लिखा #चौधरी_चरण_सिंह और मैले कुर्ते की जेब से मुहर निकाल के कागज पर ठोंक दी, जिस पर लिखा था “प्रधानमंत्री, भारत सरकार" ये देखकर सारे थाने में हड़कंप मच गया। असल में ये मैले कुर्ते वाले बाबा किसान नेता और भारत के उस समय ...

LIC :WhatsApp પર તમે ઉઠાવી શકશો એકસાથે 11 સર્વિસનો લાભ

 LIC દ્વારા આપવામાં આવેલી જાણકારી અનુસાર, જે પોલિસીધારકોએ પોતાની પોલિસીને ઓનલાઈન રજીસ્ટર્ડ નથી કરી તેઓ વોટ્સએપ પર તેનો લાભ લીધા પહેલા પોલિસીને એલઆઈસીની ઓફિશ્યલ સાઈટ પર જઈને રજીસ્ટર કરવાની રહેશે. એક વાત જે અહીં ધ્યાનમાં રાખવાની છે એ તે છે કે એલઆઈસીની પાસે તમારા રજીસ્ટર મોબાઈલ નંબરથી જ તમને વોટ્સએપ પર મેસેજ મોકલવાનો રહેશે.  LIC વોટ્સએપ નંબર: જુઓ નંબર અને સંપૂર્ણ પ્રોસેસ  સૌથી પહેલા તમારે તમારા ફોનમાં 8976862090 મોબાઈલ નંબર સેવ કરવો પડશે, જણાવી દઈએ કે આ LICનો ઓફિશિયલ વોટ્સએપ નંબર છે. ફોનમાં નંબર સેવ કર્યા પછી તમારે વોટ્સએપ ઓપન કરવું પડશે અને પછી વોટ્સએપમાં આ નંબર સાથે ચેટ બોક્સ ઓપન કરવું પડશે. ચેટ બોક્સ ખોલ્યા પછી, તમારે તેને Hi લખીને મોકલવાનું રહેશે. જેવુ તમે Hi લખીને મોકલશો, LICનો ચેટબોટ તમને સામેથી 11 વિકલ્પો મોકલશે. તમારે ફક્ત તે ઓપ્શન્સમાં જ સર્વિસ વિશે જાણકારી જોઈએ છે તેની આગળ જોવા મળી રહેલા ઓપ્શન નંબરને જોઈને મોકલવાના રહેશે. ઉદાહરણ તરીકે 1. પ્રીમિયમ ડેટ, 2. બોનસ સંબંધિત માહિતી. જો તમને પ્રીમિયમની તારીખ સંબંધિત માહિતી જોઈતી હોય તો તમારે 1 લખીને મોકલવાનું રહેશે. LIC પો...

પાંચાળ પ્રદેશ ઝાલાવાડનું એક પરગણું

  ઝાલાવાડનું એક પરગણું પાંચાળ પ્રદેશના નામે જૂના કાળથી જાણીતું છે. સુરેન્દ્રનગર જિલ્લામાં આવેલ થાનગઢ, ચોટિલા, મૂળીએ બધો વિસ્તાર પાંચાળ ગણાય છે. સ્કંદપુરાણ અને પદ્મપુરાણમાં પાંચાળનો ઉલ્લેખ મળે છે. સૂર્યદેવળને મધ્ય માનીને તેની પૂર્વે મૂખી-માંડવરાય (માર્તંડદેવ-સૂર્ય) પશ્ચિમે મહીકુ, ઉત્તરે સરામાથક અને દક્ષિણમાં ચોટિલા અને આણંદપર એમ ૧૯૬ માઈલના ધેરાવામાં આ પરગણું પથરાયેલું હતું. અહીંની પ્રજા એને ‘દેવકો પાંચાળ દેશ’ પણ કહે છે. શ્રી કનકાઇ માતાજી મંદિર : ગીર આ પંથકનું નામ પાંચાળ શાથી પડયું હશે એનું અનુમાન કરતાં માયાશંકર પંડયા નોંધે છે કે આ ભૂમિનું નામ કણ્વઋષિનાં વખતમાં પાંચાળ બોલાતું હતું તેમ જણાય છે. ‘થાનમહાત્મ્ય’ના બારમા અધ્યાયમાં આપેલ હકીકત મુજબ રામચંદ્રજીએ ગુરુ વશિષ્ટને પૂછ્યું, ‘હે મુનિવર! મેં રાવણાદિક રાક્ષસોને માર્યા એ વખતે અગસ્ત્ય ઋષિએ કહ્યું કે રાવણ તો વિપ્ર બ્રાહ્મણ હતો, એટલે તમને બ્રહ્મહત્યાનું પાપ લાગ્યું. પાપના નિવારણ અર્થે દેવભૂમિ પાંચાળમાં જાઓ. ત્યાં કણ્વ, ગાલવ, ઓતિથ્ય, અંગીરા અને ભ્રેસપતિ આદિ પાંચ ઋષિઓના તપથી પાવન થયેલી ભૂમિ છે. પાંચ ઋષિઓના વસવાટ પરથી આ પ્રદેશ પાંચાળ દેશન...