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विदिशा में घुमने के लिए प्रमुख पर्यटन स्थल

 विदिशा में घुमने के लिए प्रमुख पर्यटन स्थल

1. साँची स्तूप – साँची का स्तूप भारत के उन एतिहासिक स्मारकों में से एक है जिनका निर्माण भारत के सबसे महान सम्राट राजा अशोक ने अपने शासन कल के बाद बुद्ध धर्म धारण करने के बाद उनके अनुयियो के लिए बनवाया था | यहाँ सम्राट अशोक के शिलालेख भी मिलते है | आज साँची का स्तूप विश्व धरोहरों में शामिल है जिसे देखने के लिए भारत ही नहीं विदेशी पर्यटक भी पुरे साल आते है | यहाँ आपको तीन स्तूप मिलेगें तीनो स्तूपो में भारतीय वास्तुकला का कारीगरों द्वारा बेहद ही खुबसूरत कारीगिरी द्वारा दर्शाया गया है, यहाँ स्थित तीन स्तुपो में से मुख्य स्तूप में भगवान बुद्ध की अस्थियां रखी गयी है, इस स्तूप द्वार पर बने तोरण में भगवान बुद्ध के जीवन को कारीगरों द्वारा बहुत ही खूबसूरती से दर्शाया गया है | यहाँ आपको स्तुपो के अलावा कई खुबसूरत मंदिर भी मिलेंगे, कहा जाता है ये मंदिर गुप्तकाल के राजाओ के द्वारा बनाये गए है | वहीँ इसके पास एक संग्रहालय भी बना हुआ है जिसमे आपको बुद्ध काल और मौर्य काल की कई प्रतिमाये देखने को मिलेगी, इस संग्रहालय में जाने के लिए आपको इंट्री फीस देनी पड़ेगी | साँची स्तूप को घुमने का समय सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक का है| इस समय के बीच आप स्तूप के आसपास के पुरे क्षेत्र को बिना किसी परेशानी के घूम सकते है|

         
2. गाडरमल मंदिर – गाडरमल मंदिर देश के प्रमुख प्राचीन मंदिरों में से एक है इसका निर्माण 11 वीं शताब्दी ईसा में हुआ था | इस मंदिर को विजयमंदिरा मंदिर के रूप में भी जाना जाता है | यह मंदिर चर्चिका देवी या चंडिका देवी को समर्पित है | यहाँ आपको इस मंदिर के काफी बड़े होने के भी प्रमाण मिलेंगे जिसका निर्माण उस समय के परमार शासको द्वारा कराया गया था, जिसके अवशेष आपको मंदिर के आस पास मिल जायेगे | जिन्हें देख कर आप समझ जायेगे की किसी कारण से इस मंदिर का निर्माण पूर्ण नहीं हो सका | यहीं पास में के बावड़ी भी बनी हुई है जिसे देख कर आप जान सकते है की उस समय यह मंदिर कितना समर्द्ध होगा, इस बावड़ी का निर्माण 7 वीं शताब्दी का बताया जाता है, इसमें दो स्तम्भ बने हुए है जिसमे भगवान कृष्ण के जीवनकाल को दृश्यमान किया गया है |


3. उदयगिरी की गुफाएं – विदिशा में स्थित उदयगिरी की गुफाएं सम्पूर्ण भारत में और यहाँ आने वाले विदेशी पर्यटकों के मुख्य आकर्षण का केंद्र है, उदयगिरी की गुफाएं पुरे देश में प्रसिद्द है | ये गुफाएं बेतवा और वैस नदी के मध्य में बनी हुई है जो विदिशा शहर से करीब 2 मील की दुरी पर स्थित है | इन गुफाओं में हिन्दू देवी देवतो की मूर्तियों के साथ बुद्ध धर्म से जुडी कई कलाकृतिय एवं कई पुरातात्विक अवशेष भी मिलते है | यहाँ भगवान विष्णु की शयन अवस्था में एक मूर्ति है साथ ही यहाँ पाई जाने वाली अधिकतर मुर्तिया भगवान शिव और उनके अवतारों को प्रदर्शित करती है | पत्थरो को काट कर जिस प्रकार से इन गुफाओ में मूर्तियों को तराशा गया है उससे भारतीय वस्तुकाला का एक अद्भुत उदहारण कहा जा सकता है | इन गुफाओ का निर्माण गुप्त काल के दौरान हुआ था | इन गुफाओ के आस पास का नजारा बेहद ही खुबसूरत और प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण है आप यहाँ घंटो अपना समय गुजार सकते है |



   

4. लोहांगी पर्वत – लोहांगी पर्वत विदिशा शहर से 4 किमी दूर शहर के बीचोबीच स्थित है, इस पर्वत पर बरसात के बाद जाने का समय सबसे सही है क्यों की इस समय यहाँ का वातावरण सुहाना और ठंडा रहता है और साथ ही प्राकृतिक सौन्दर्य भी अपने चरम पर होता है पहाड़ी पर एक छोटा सा मंदिर स्थित है जो चारो और से हरियाली से घिरा हुआ है | इस पहाड़ी से आप पुरे शहर की खूबसूरती का आनंद ले सकते है |
   

5. माधव उद्यान – माधव उद्यान शहर का सबसे खुबसूरत उद्यान है और यहाँ आने वाले पर्यटकों भी अपनी और आकर्षित करता है | इस उद्यान की सबसे खास बात यह है की इसके बीच एक झील है जो इसके वातावरण को बेहद ही खूबसूरत बनाती है | इस उद्यान का निर्माण स्वर्गीय माधव राव सिंधिया को समर्पित कर करवाया गया था | यहाँ आप अपने परिवार के साथ अच समय व्यतित कर सकते है साथ ही झील में बोटिंग का भी मजा ले सकते है, उद्यान में घुमने का समय सुबह और शाम का है | सुबह आप 6 बजे से 9 बजे तक तो शाम में 5 बजे से 8 बजे तक घूम सकते है | शाम के समय यहाँ सन सेट देखने का अलग ही आनंद है ये नजारा बेहद ही खुबसूरत होता है |

    

6. जिला संग्रहालय – अगर आप भी विदिशा और मध्यप्रदेश के इतिहास को बारीकी से जानना चाहते है तो आप इस संग्रहालय जा कर आसानी से उसे जान सकते है | म्यूजियम में विदिशा नगर से सम्बंधित और कई धर्मो से सम्बंधित कलाकृतियां देखने को मिलेगी साथ ही आप यहाँ पुरातत्व से जुडी कई ढेर साडी जानकारी भी जुटा सकते है | इस संग्रहालय में प्रवेश के लिए आपको कुछ शुल्क देना पड़ेगा, साथ ही अगर आप यहाँ पर स्थित चीजों को अपने कैमरे में कद करना चाहते है तो उसके भी आपको अलग से शुल्क देना होगा | संग्रहालय सुबह 11 से शाम 5 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है |


    

7. गरुड़ स्तम्भ या खम्बा बाबा - विदिशा शहर से कुछ किमी की दुरी पर स्थित गरुड़ स्तम्भ भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है | इसका निर्माण हेलियोडोरस नाम के एक विदेशी ने करवाया था, जो की एक यूनानी था, कहा जाता है हेलियोडोरस पहला ऐसा विदेशी था जो भगवान श्री कृष्ण का अनन्य भक्त था, इसी कारण इस स्तम्भ को लोग हेलियोडोरस स्तम्भ या खम्ब भी कहते है | इस स्तम्भ की ऊंचाई 20 फीट है और इसका निर्माण मौर्य काल के दौरान आज से 2000 वर्ष पूर्व मन जाता है | जो इस खम्ब पर अभिलेखित अभिलेखों से पता चलता है | गरुड़ स्तम्भ के शीर्ष पर भगवान गरुड़ देव की प्रतिमा बनी हुई है इसी कारण इसे गरुड़ स्तम्भ भी कहते है | ये स्तम्भ हलाली नदी और बेतवा नदी के संगम पर स्थित है, इस स्तम्भ के तीन भाग है जिनके नाम फलकित छड, बेल केपिटल और गरुड़ की मूर्ति है जो एक छतिग्रस्त एबेकस पर स्थित है | आप पुरे परिवार के साथ यहाँ अच्छे से समय बिता सकते है |

 


      

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શું તમે જાણો છો કે પાળિયા મુખત્વે ૧૧ પ્રકારના હોય છે, ચાલો આજે પાળિયા ના પ્રકારો વિષે થોડું જાણીયે

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