गुजरात के पंचमहल जिले में बना पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है। यहां की खास बात यह है कि यहां दक्षिणमुखी काली मां की मूर्ति है
गुजरात के पंचमहल जिले में बना पावागढ़ महाकाली का मंदिर पौराणिक,ऐतिहासिक,धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है। यहां की खास बात यह है कि यहां दक्षिणमुखी काली मां की मूर्ति है,जिसका तांत्रिक पूजा में बहुत अधिक महत्व माना जाता है।
पावागढ़ काली मंदिर से कई ऐतिहासिक और धार्मिक रहस्य जुड़े हुए हैं, जो कि इस जगह को और भी खास बनाते हैं। कुछ बातें भगवान राम के पुत्र लव-कुश से जुड़ी हैं, तो कुछ ऋषि विश्वामित्र से।
आइए अब आपको बताते हैं पावागढ़ से जुड़ी कहानियां- इसलिए पड़ा इस जगह का नाम पावागढ़- पावागढ़ के नाम के पीछे एक कहानी प्रचलित है। कहते हैं एक जमाने में इस दुर्गम पर्वत पर चढ़ाई लगभग असंभव थी। चारों तरफ खाइयों से घिरे होने के कारण यहां हवा का वेग भी हर तरफ बहुत ज्यादा रहता है, इसलिए इसे पावागढ़ अर्थात वैसी जगह जहां पवन (हवा) का हमेशा वास हो कहा जाता है।
पावागढ़ पहाड़ियों की तलहटी में चंपानेरी नगरी है,जिसे महाराज वनराज चावड़ा ने अपने बुद्धिमान मंत्री के नाम पर बसाया था। पावागढ़ पहाड़ी की शुरुआत चंपानेर से होती है।1471फीट की ऊंचाई पर माची हवेली है। मंदिर तक जाने के लिए माची हवेली से रोपवे की सुविधा उपलब्ध है। यहां से पैदल मंदिर तक पहुंचने लिए लगभग250सीढ़ियां चढ़नी पढ़ती हैं।
लव-कुश सहित कई ऋषियों ने यहीं पाया था मोक्ष पावागढ़ का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व है। बताया जाता है कि यह मंदिर अयोध्या के राजा भगवान श्रीराम के समय का है। इस मंदिर को एक जमाने में शत्रुंजय मंदिर कहा जाता था। मान्यता हैं कि भगवान राम के पुत्र लव और कुश, कई ऋषियों और बौद्ध भिक्षुओं ने यहां मोक्ष प्राप्त किया था। विश्वामित्र ने स्थापित की थी यहां मां काली की मूर्ति यह भी माना जाता हैं कि मां काली की मूर्ति को विश्वामित्र ने ही स्थापित किया था। यहां बहने वाली नदी का नाम भी उन्हीं के नाम पर विश्वामित्री पड़ा।
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