Skip to main content

कृष्ण ने द्रौपदी के पुकारने का इंतजार क्यों किया?

 महाभारत में द्युतक्रीड़ा के समय युद्धिष्ठिर ने द्रौपदी को दांव पर लगा दिया और दुर्योधन की ओर से मामा शकुनि ने द्रोपदी को जीत लिया। उस समय दुशासन द्रौपदी को बालों से पकड़कर घसीटते हुए सभा में ले आया। जब वहां द्रौपदी का अपमान हो रहा था तब भीष्मपितामह, द्रोणाचार्य और विदुर जैसे न्यायकर्ता और महान लोग भी बैठे थे लेकिन वहां मौजूद सभी बड़े दिग्गज मुंह झुकाएं बैठे रह गए।

 
द्रौपदी को घसीटकर लाया जा रहा था तब तक भी द्रौपदी को यह भान नहीं था कि मेरा चीरहरण होने वाला है। जब दुशासन से भारी सभा में द्रौपदी की साड़ी उतारने के लिए कहा गया तब द्रौपदी को इस बात का अहसास हुआ की संकट बड़ा है। उस वक्त उनने अपने सबसे प्रिय सखा भगवान श्रीकृष्ण का नाम पुकारा। ‘हरि, हरि, अभयम कृष्णा, अभयम’
 
उद्धव गीता या उद्धव भागवत में श्रीकृष्ण के सखा उद्धव उनसे इस संबंध में कई सवाल करते हैं। आओ जानते हैं श्रीकृष्ण उद्धव संवाद को...
 
 
उद्धव कहते हैं, हे कृष्ण, आप पांडवों के आत्मीय प्रिय मित्र थे। आजाद बांधव के रूप में उन्होंने सदा आप पर पूरा भरोसा किया। कृष्ण, आप महान ज्ञानी हैं। आप भूत, वर्तमान व भविष्य के ज्ञाता हैं। किन्तु आपने सच्चे मित्र की जो परिभाषा दी है, क्या आपको नहीं लगता कि आपने उस परिभाषा के अनुसार कार्य नहीं किया?
 
आपने धर्मराज युधिष्ठिर को द्यूत (जुआ) खेलने से रोका क्यों नहीं? चलो ठीक है कि आपने उन्हें नहीं रोका, लेकिन आपने भाग्य को भी धर्मराज के पक्ष में भी नहीं मोड़ा। आप चाहते तो युधिष्ठिर जीत सकते थे। आप कम से कम उन्हें धन, राज्य और यहां तक कि खुद को हारने के बाद तो रोक सकते थे। उसके बाद जब उन्होंने अपने भाईयों को दांव पर लगाना शुरू किया, तब तो आप सभाकक्ष में पहुंच सकते थे। आपने वह भी नहीं किया?
 

 
उसके बाद जब दुर्योधन ने पांडवों को सदैव अच्छी किस्मत वाला बताते हुए द्रौपदी को दाँव पर लगाने को प्रेरित किया, और जीतने पर हारा हुआ सब कुछ वापस कर देने का लालच दिया, कम से कम तब तो आप हस्तक्षेप कर ही सकते थे। अपनी दिव्य शक्ति के द्वारा आप पांसे धर्मराज के अनुकूल कर सकते थे। इसके स्थान पर आपने तब हस्तक्षेप किया, जब द्रौपदी लगभग अपना शील खो रही थी, तब आपने उसे वस्त्र देकर द्रौपदी के शील को बचाने का दावा किया। लेकिन आप यह यह दावा भी कैसे कर सकते हैं? 

 
उसे एक आदमी घसीटकर सभा में लाता है, और इतने सारे लोगों के सामने निर्वस्त्र करने के लिए छोड़ देता है। एक महिला का शील क्या बचा? आपने क्या बचाया? अगर आपने संकट के समय में अपनों की सहायता नहीं की तो आपको आपाद-बांधव कैसे कहा जा सकता है? बताइए, आपने संकट के समय में सहायता नहीं की तो क्या फायदा? क्या यही धर्म है?'...इन प्रश्नों को पूछते-पूछते उद्धव का गला रुंध गया और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे।
 
 
भगवान श्रीकृष्ण मुस्कुराते हुए बोले:- प्रिय उद्धव, यह सृष्टि का नियम है कि विवेकवान ही जीतता है। उस समय दुर्योधन के पास विवेक था, धर्मराज के पास नहीं। यही कारण रहा कि धर्मराज पराजित हुए।
 
उद्धव को हैरान परेशान देखकर कृष्ण जी आगे बोले : दुर्योधन के पास जुआ खेलने के लिए पैसा और धन तो बहुत था, लेकिन उसे पासों का खेल खेलना नहीं आता था, इसलिए उसने अपने मामा शकुनि का द्यूतक्रीड़ा के लिए उपयोग किया। यही विवेक है। धर्मराज भी इसी प्रकार सोच सकते थे और अपने चचेरे भाई से पेशकश कर सकते थे कि उनकी तरफ से मैं खेलूंगा।
 
जरा विचार करो कि अगर शकुनी और मैं खेलते तो कौन जीतता? पासे के अंक उसके अनुसार आते या मेरे अनुसार? चलो इस बात को जाने दो। उन्होंने मुझे खेल में शामिल नहीं किया, इस बात के लिए उन्हें क्षमा किया जा सकता है। लेकिन उन्होंने विवेक-शून्यता से एक और बड़ी गलती की। और वह यह कि उन्होंने मुझसे प्रार्थना की कि मैं तब तक सभाकक्ष में न आऊं, जब तक कि मुझे बुलाया न जाए। क्योंकि वे अपने दुर्भाग्य से खेल मुझसे छुपकर खेलना चाहते थे। वे नहीं चाहते थे, मुझे मालूम पड़े कि वे जुआ खेल रहे हैं।
 
 
इस प्रकार उन्होंने मुझे अपनी प्रार्थना से बांध दिया। मुझे सभाकक्ष में आने की अनुमति नहीं थी। इसके बाद भी मैं कक्ष के बाहर इंतजार कर रहा था कि कब कोई मुझे बुलाता है। भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव सब मुझे भूल गए। बस अपने भाग्य और दुर्योधन को कोसते रहे। अपने भाई के आदेश पर जब दुशासन द्रौपदी को बाल पकड़कर घसीटता हुआ सभाकक्ष में लाया, द्रौपदी अपनी सामर्थ्य के अनुसार जूझती रही। तब भी उसने मुझे नहीं पुकारा। उसकी बुद्धि तब जागृत हुई, जब दुशासन ने उसे निर्वस्त्र करना प्रारंभ किया।
 
 
जब उसने स्वयं पर निर्भरता छोड़कर- ‘हरि, हरि, अभयम कृष्णा, अभयम’ की गुहार लगाई, तब मुझे उसके शील की रक्षा का अवसर मिला। जैसे ही मुझे पुकारा गया, मैं अविलम्ब पहुiच गया। अब इस स्थिति में मेरी गलती बताओ?”
 
उद्धव बोले : कान्हा आपका स्पष्टीकरण प्रभावशाली अवश्य है, किन्तु मुझे पूर्ण संतुष्टि नहीं हुई। क्या मैं एक और प्रश्न पूछ सकता हूं? कृष्ण की अनुमति से उद्धव ने पूछा:- इसका अर्थ यह हुआ कि आप तभी आओगे, जब आपको बुलाया जाएगा? क्या संकट से घिरे अपने भक्त की मदद करने आप स्वतः नहीं आओगे?
 
 
कृष्ण जी मुस्कुराए:- उद्धव इस सृष्टि में हरेक का जीवन उसके स्वयं के कर्मफल के आधार पर संचालित होता है।
न तो मैं इसे चलाता हूं और न ही इसमें कोई हस्तक्षेप करता हूं मैं केवल एक ‘साक्षी’ हूं। मैं सदैव तुम्हारे नजदीक रहकर जो हो रहा है उसे देखता हूं। यही ईश्वर का धर्म है।
 
उलाहना देते हुए उद्धव ने पूछा- वाह-वाह, बहुत अच्छा कृष्ण, तो इसका अर्थ यह हुआ कि आप हमारे समीप खड़े रहकर हमारे सभी दुष्कर्मों का निरीक्षण करते रहेंगे? हम पाप पर पाप करते रहेंगे और आप हमें साक्षी बनकर देखते रहेंगे? आप क्या चाहते हैं कि हम भूल करते रहें? पाप की गठरी बांधते रहें और उसका फल भुगतते रहें?

 
तब कृष्ण जी बोले:-उद्धव, तुम शब्दों के गहरे अर्थ को समझो। जब तुम समझकर अनुभव कर लोगे कि मैं तुम्हारे समीप साक्षी के रूप में हर पल हूं, तो क्या तुम कुछ भी गलत या बुरा कर सकोगे?
 
तुम निश्चित रूप से कुछ भी बुरा नहीं कर सकोगे। जब तुम यह भूल जाते हो और यह समझने लगते हो कि मुझसे छुपकर कुछ भी कर सकते हो, तब ही तुम कठिनाइयों में फंसते हो! धर्मराज का अज्ञान यह था कि उसने माना कि वह मेरी जानकारी के बिना जुआ खेल सकता है। अगर उसने यह समझ लिया होता कि मैं प्रत्येक के साथ हर समय साक्षी रूप में उपस्थित हूं तो क्या खेल का रूप कुछ और नहीं होता?
 

उद्धव मंत्रमुग्ध हो गए और बोले:- प्रभु कितना गहरा दर्शन है। कितना महान सत्य। ‘प्रार्थना’ और ‘पूजा-पाठ’ से, ईश्वर को अपनी मदद के लिए बुलाना तो महज हमारी ‘पर-भावना’ है। किंतु जैसे ही हम यह विश्वास करना शुरू करते हैं कि ‘ईश्वर’ के बिना पत्ता भी नहीं हिलता, तब हमें साक्षी के रूप में उनकी उपस्थिति महसूस होने लगती है। गड़बड़ तब होती है, जब हम इसे भूलकर सांसारिकता में डूब जाते हैं।


Comments

Popular posts from this blog

EPFO ; Employees Provident Fund Organization

 इम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) के लाभार्थियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। EPFO ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए इंटरेस्ट जमा करने की प्रोसेस शुरू कर दी है। जिसके बाद अब जल्द ही EPFO के 7 करोड़ सब्सक्राइबर्स के अकाउंट में इंटरेस्ट का पैसा रिफ्लेक्ट होना शुरू हो जाएगा। इस बात की जानकारी EPFO ने हाल ही में ट्वीट कर दी है। इसी साल मार्च में EPFO ने 8.1% इंटरेस्ट रेट का ऐलान किया था, जो पिछले 40 सालों में सबसे कम ब्याज दर है। इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप किस तरह अपने PF अकाउंट में आए इंटरेस्ट को चेक कर सकते हैं। वेबसाइट पर कैसे चेक करें अपना अकाउंट बैलेंस ? सब्सक्राइबर सबसे पहले EPFO की ऑफिशियल वेबसाइट epfindia.gov.in पर जाएं। अब सर्विस टैब पर जाएं। यहां आपको 'For Employees' सर्च और सिलेक्ट करना है। यहां से आप नए पेज पर पहुंच जाएंगे, जहां आपको 'Member Passbook' पर क्लिक करना होगा। और इसके बाद (UAN) और पासवर्ड एंटर करना होगा। पासबुक ओपन होने के बाद उसमें एम्प्लायर कंट्रीब्यूशन, इंडिविजुअल कंट्रीब्यूशन और इंटरेस्ट दिखेगा। इम्प्लॉई जो एक से ज्यादा कं...

મહાન હિન્દુ સંત શ્રી જલારામ બાપા વિશે જાણવા જેવો ઈતિહાસ

 જન્મ- ૪ નવેમ્બર ૧૭૯૯ અવસાન – ૨૩ ફેબ્રુઆરી ૧૮૮૧ સંત શ્રી જલારામબાપાનો જન્મ ઇ.સ. વિક્રમ સંવત ૧૮૫૬ની કારતક સુદ સાતમે લોહાણા સમાજના ઠક્કર કુળમાં થયો હતો. તે ભગવાન રામના ભક્ત હતા. જલારામ બાપાને ગૃહસ્થ જીવન કે પોતાના પિતાનો વ્યવસાય સ્વીકરારવામાં કોઈ રસ નહોતો. તેઓ હંમેશા યાત્રાળુઓ, સંતો અને સાધુઓની સેવામાં રોકાયેલા રહેતા. તેઓ પોતાના પિતાથી છૂટા થઈ ગયા અને તેમના કાકા વાલજીભાઈએ યુવાન જલારામ અને તેમની માતાને પોતાને ઘેર રહેવા સૂચવ્યું. ૧૮૧૬ની સાલમાં ૧૬ વર્ષની ઊંમરે તેમના લગ્ન આટકોટના પ્રાગજીભાઈ ઠક્કરની પુત્રી વીરબાઈ સાથે કરવામાં આવ્યાં. વીરબાઈ પણ ધાર્મિક અને સંતઆત્મા હતા આથી તેમણે પણ જલારામ બાપા સાથે સંસારીવૃત્તિઓથી વિરક્ત રહી ગરીબો અને જરૂરિયાતમંદોની સેવાના કાર્યમાં ઝંપલાવી દીધું. વીસ વર્ષની વયે જલારામે આયોધ્યા, કાશી અને બદ્રીનાથની જાત્રાએ જવાનું નક્કી કર્યું ત્યારે પત્નિ વીરબાઈ પણ તેમની સાથે જોડાયા. ૧૮ વર્ષની ઉંમરે તેઓ ગુજરાતના ફતેહપુરના ભોજા ભગતના અનુયાયી બન્યા. ભોજા ભગતે તેમને “ગુરુ મંત્ર”, માળા અને શ્રી રામનું નામ આપ્યું. તેમના ગુરુના આશીર્વાદથી તેમણે ‘સદાવ્રત’ની શરૂઆત કરી. સદાવ...

केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ ?, दो मिनट की ये कहानी रौंगटे खड़े कर देगी

 केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ ?, दो मिनट की ये कहानी रौंगटे खड़े कर देगी " एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ का मार्ग पूछ लेता। मन में भगवान शिव का ध्यान करता रहता। चलते चलते उसको महीनो बीत गए।* *आखिरकार एक दिन वह केदार धाम पहुच ही गया। केदारनाथ में मंदिर के द्वार 6 महीने खुलते है और 6 महीने बंद रहते है। वह उस समय पर पहुचा जब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे। पंडित जी को उसने बताया वह बहुत दूर से महीनो की यात्रा करके आया है। पंडित जी से प्रार्थना की - कृपा कर के दरवाजे खोलकर प्रभु के दर्शन करवा दीजिये । लेकिन वहां का तो नियम है एक बार बंद तो बंद। नियम तो नियम होता है। वह बहुत रोया। बार-बार भगवन शिव को याद किया कि प्रभु बस एक बार दर्शन करा दो। वह प्रार्थना कर रहा था सभी से, लेकिन किसी ने भी नही सुनी। पंडित जी बोले अब यहाँ 6 महीने बाद आना, 6 महीने बाद यहा के दरवाजे खुलेंगे। यहाँ 6 महीने बर्फ और ढंड पड़ती है। और सभी जन वहा से चले गये। वह वही पर रोता रहा। र...

અક્ષૌહિણી સેના

પ્રાચીન ભારતમાં અક્ષૌહિણી એક સૈન્ય તરીકે ગણાય છે. મહાભારતના એ ધર્મયુદ્ધમાં અઢાર અક્ષૌહિણી સેનાનો નાશ થયો હતો. મહાભારતના યુધ્ધમાં સૈન્યમાં મનુષ્યોની સંખ્યા ઓછામાં ઓછી ૪૬૮૧૯૨૦ હતી  ઘોડાઓની સંખ્યા ૨૭૧૫૬૨૦ હતી  આમ્ર આય્લીજ સંખ્યામાં હાથીઓ હતાં  આ સંખ્યાથી તો એખ્યલ આવુજ ગયો હશે ને કે મહાભારતનું કુરુક્ષેત્રનું યુદ્ધ  કેટલું ભયંકર અને વિનાશકારી હતું ! મહાભારત મુજબ,  કુરુક્ષેત્રના યુદ્ધમાં કુલ ૧૮ અક્ષૌહિણી સેનાઓએ યુદ્ધમાં ભાગ લીધો હતો  આ પૈકી, ૧૧ અક્ષૌહિણી સેના કૌરવોના પક્ષમાં હતી  જ્યારે ૭ અક્ષૌહિણી સેના પંડવોની તરફેણમાં લડી હતી  અક્ષૌહિણી સેનામાં કેટલા રથ, હાથી, પાયદળ અને અને ઘોડા હોય છે  આના સંબંધમાં મહાભારતના પર્વસંગ્રાહના પર્વનાં દ્વિતીય અધ્યાયમાં આનું વિસ્તારપૂર્વક વર્ણન કરવામાં આવ્યું છે  એ માહિતી આજે હું તમને આપવાં માંગુ છું   અક્ષૌહિણી સેના  " અક્ષૌહિણી હિ સેના સા તદા યૌધિષ્ઠીરં બલમ ।  પ્રવિશ્યાન્તદર્ઘે રાજન્સાગરં કુનદી યથા ॥  વિભાગ  કોઇપણ અક્ષૌહિણી સેના ગજ (હાથી સવાર)  રથ (રથી) ઘોડા (ઘો...

5 રાજ્યોની વિધાનસભા ચૂંટણીના પરિણામો LIVE

  યોગી અદિત્યનાથ વહેલી સવારે પહોંચ્યા મંદિર ઉત્તરપ્રદેશ સહિતના પાંચ રાજ્યોમાં આજે વિધાનસભા ચૂંટણીના પરિણામો, UP ના મુખ્યમંત્રી યોગી અદિત્યનાથ વહેલી સવારે મંદિર પહોંચ્યા નેતાઓ ભગવાનના શરણે  ઉત્તરપ્રદેશમાં મતગણતરી અગાઉ ભાજપ નેતા રાજેશ્વર સિંઘ ચંદ્રિકા દેવી મંદિરે દર્શનાર્થે પહોંચ્યા 5 states election results Infogram

રોજગાર સમાચાર 02.03.2022

 રોજગાર સમાચાર 02.03.2022 ડાયનોસોર પાર્ક ગુજરાત

શું તમે જાણો છો કે પાળિયા મુખત્વે ૧૧ પ્રકારના હોય છે, ચાલો આજે પાળિયા ના પ્રકારો વિષે થોડું જાણીયે

 1) ખાંભી: આ પ્રકારનો પાળીયો એટલે કે કોતરકામ વગર બાંધવામાં આવેલ કોઈ મૃત વ્યક્તિનું સ્મારક જેને આપણે ખાંભી તરીકે ઓળખીયે છીએ. 2) થેસા: એક એવો પ્રકાર છે જેમાં પાળિયાની નજીકમાં નાનાં પથ્થરો ગોઠવવામાં આવે છે જેને થેસા પણ કહે છે 3) ચાગીયો: કોઈ ઘટના કે વ્યક્તિના સંભારણા તરીકે નાના મોટા પત્થરોના ઢગલા કરી ને ચાગીયો બનાવવાં આવે છે, આ પ્રકારના પાળિયા બહુ ઓછા જોવા મળે છે. 4) સુરાપુરા: અન્યના જીવન માટે યુદ્ધમાં ખપી જનાર યોદ્ધાઓ જેને આપણે સૌ કોઈ સુરાપુરા તરીકે ઓળખીયે છીએ અને એમની યાદમાં સુરાપુરાના પાળિયા બને છે. 5) સુરધન: કોઈ આબરૂદાર અને શૂરવીર વ્યક્તિનું આકસ્મિક મૃત્યુ થાય ત્યારે આવા અકસ્માતની યાદમાં બાંધવામાં આવેલા પાળિયા ને સુરધન ના પાળિયા તરીકે વર્ગીકૃત કરવામાં આવે છે. તેમાંના કેટલાક પાળિયાને સતીમાતા અથવા ઝુઝાર મસ્તિષ્ક વગરનાં યોદ્ધાઓ પણ કહેવામાં આવે છે. 6) યોદ્ધાઓના પાળિયા: આ પ્રકારના સ્મારકો અથવા પાળિયા ઓ સૌથી સામાન્ય અને ઠેર ઠેર જોવા મળતા હોય છે, યોધ્ધાઓના પાળિયા મોટે ભાગે લડાઈના નાયકોની પૂજા કરતા લોક-સમુદાય અને લોકજાતિઓ સાથે સંકળાયેલ હોય છે. તેઓ મર્યાદિત વિસ્તારમાં એકી સાથે મોટી ...

जब एक किसान गंदे कपड़े पहन थाने पहुंचा, पूरा थाना हुआ सस्पेंड.....

सन् 1979 की बात है। शाम 6 बजे एक किसान इटावा ज़िला के ऊसराहार थाने में मैला कुचैला कुर्ता धोती पहने पहुँचा और अपने बैलों की चोरी की रिपोर्ट लिखाने की बात की। छोटे दरोग़ा ने पुलिसिया अंदाज में 4 आड़े-टेढ़े सवाल पूछे और रिपोर्ट बिना लिखे ही किसान को चलता किया। जब वो किसान थाने से जाने लगा तो एक सिपाही पीछे से आया और बोला “बाबा थोड़ा खर्चा-पानी दे तो रिपोर्ट लिख दी जाएगी।” अंत में 35 रूपये की रिश्वत लेकर रिपोर्ट लिखना तय हुआ। रिपोर्ट लिख कर मुंशी ने किसान से पूछा “बाबा हस्ताक्षर करोगे कि अंगूठा लगाओगे?” किसान ने हस्ताक्षर करने को कहा तो मुंशी ने दफ़्ती आगे बढ़ा दी जिस पर प्राथमिकी का ड्राफ़्ट लिखा था। किसान ने पेन के साथ अंगूठे वाला पैड उठाया तो मुंशी सोच में पड़ गया। हस्ताक्षर करेगा तो अंगूठा लगाने की स्याही का पैड क्यों उठा रहा है? किसान ने हस्ताक्षर में नाम लिखा #चौधरी_चरण_सिंह और मैले कुर्ते की जेब से मुहर निकाल के कागज पर ठोंक दी, जिस पर लिखा था “प्रधानमंत्री, भारत सरकार" ये देखकर सारे थाने में हड़कंप मच गया। असल में ये मैले कुर्ते वाले बाबा किसान नेता और भारत के उस समय ...

LIC :WhatsApp પર તમે ઉઠાવી શકશો એકસાથે 11 સર્વિસનો લાભ

 LIC દ્વારા આપવામાં આવેલી જાણકારી અનુસાર, જે પોલિસીધારકોએ પોતાની પોલિસીને ઓનલાઈન રજીસ્ટર્ડ નથી કરી તેઓ વોટ્સએપ પર તેનો લાભ લીધા પહેલા પોલિસીને એલઆઈસીની ઓફિશ્યલ સાઈટ પર જઈને રજીસ્ટર કરવાની રહેશે. એક વાત જે અહીં ધ્યાનમાં રાખવાની છે એ તે છે કે એલઆઈસીની પાસે તમારા રજીસ્ટર મોબાઈલ નંબરથી જ તમને વોટ્સએપ પર મેસેજ મોકલવાનો રહેશે.  LIC વોટ્સએપ નંબર: જુઓ નંબર અને સંપૂર્ણ પ્રોસેસ  સૌથી પહેલા તમારે તમારા ફોનમાં 8976862090 મોબાઈલ નંબર સેવ કરવો પડશે, જણાવી દઈએ કે આ LICનો ઓફિશિયલ વોટ્સએપ નંબર છે. ફોનમાં નંબર સેવ કર્યા પછી તમારે વોટ્સએપ ઓપન કરવું પડશે અને પછી વોટ્સએપમાં આ નંબર સાથે ચેટ બોક્સ ઓપન કરવું પડશે. ચેટ બોક્સ ખોલ્યા પછી, તમારે તેને Hi લખીને મોકલવાનું રહેશે. જેવુ તમે Hi લખીને મોકલશો, LICનો ચેટબોટ તમને સામેથી 11 વિકલ્પો મોકલશે. તમારે ફક્ત તે ઓપ્શન્સમાં જ સર્વિસ વિશે જાણકારી જોઈએ છે તેની આગળ જોવા મળી રહેલા ઓપ્શન નંબરને જોઈને મોકલવાના રહેશે. ઉદાહરણ તરીકે 1. પ્રીમિયમ ડેટ, 2. બોનસ સંબંધિત માહિતી. જો તમને પ્રીમિયમની તારીખ સંબંધિત માહિતી જોઈતી હોય તો તમારે 1 લખીને મોકલવાનું રહેશે. LIC પો...

પાંચાળ પ્રદેશ ઝાલાવાડનું એક પરગણું

  ઝાલાવાડનું એક પરગણું પાંચાળ પ્રદેશના નામે જૂના કાળથી જાણીતું છે. સુરેન્દ્રનગર જિલ્લામાં આવેલ થાનગઢ, ચોટિલા, મૂળીએ બધો વિસ્તાર પાંચાળ ગણાય છે. સ્કંદપુરાણ અને પદ્મપુરાણમાં પાંચાળનો ઉલ્લેખ મળે છે. સૂર્યદેવળને મધ્ય માનીને તેની પૂર્વે મૂખી-માંડવરાય (માર્તંડદેવ-સૂર્ય) પશ્ચિમે મહીકુ, ઉત્તરે સરામાથક અને દક્ષિણમાં ચોટિલા અને આણંદપર એમ ૧૯૬ માઈલના ધેરાવામાં આ પરગણું પથરાયેલું હતું. અહીંની પ્રજા એને ‘દેવકો પાંચાળ દેશ’ પણ કહે છે. શ્રી કનકાઇ માતાજી મંદિર : ગીર આ પંથકનું નામ પાંચાળ શાથી પડયું હશે એનું અનુમાન કરતાં માયાશંકર પંડયા નોંધે છે કે આ ભૂમિનું નામ કણ્વઋષિનાં વખતમાં પાંચાળ બોલાતું હતું તેમ જણાય છે. ‘થાનમહાત્મ્ય’ના બારમા અધ્યાયમાં આપેલ હકીકત મુજબ રામચંદ્રજીએ ગુરુ વશિષ્ટને પૂછ્યું, ‘હે મુનિવર! મેં રાવણાદિક રાક્ષસોને માર્યા એ વખતે અગસ્ત્ય ઋષિએ કહ્યું કે રાવણ તો વિપ્ર બ્રાહ્મણ હતો, એટલે તમને બ્રહ્મહત્યાનું પાપ લાગ્યું. પાપના નિવારણ અર્થે દેવભૂમિ પાંચાળમાં જાઓ. ત્યાં કણ્વ, ગાલવ, ઓતિથ્ય, અંગીરા અને ભ્રેસપતિ આદિ પાંચ ઋષિઓના તપથી પાવન થયેલી ભૂમિ છે. પાંચ ઋષિઓના વસવાટ પરથી આ પ્રદેશ પાંચાળ દેશન...