ब्रह्माजी के मानस पुत्र स्वयंभू मनु ने दो पुत्र थे – प्रियवद और उत्तानपाद. राजा उत्तानपाद ने दो विवाह किये. उनकी पहली पत्नि का नाम सुनीति था और दूसरी का नाम सुरुचि. दोनों रानियों से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई. सुनीति के पुत्र का नाम ध्रुव रखा गया और सुरुचि के पुत्र का नाम उत्तम. उत्तानपाद दोनों राजकुमारों के प्रति समान प्रेमभाव रखते थे. रानी सुनीति भी अपने पुत्र ध्रुव की तरह उत्तम को भी अपना ही पुत्र मान स्नेह किया करती थी. किंतु सुरुचि के मन में सुनीति और ध्रुव के प्रति ईर्ष्याभाव था. एक दिन उत्तम अपने पिता की गोद में बैठा खेल रहा था. उत्तानपाद उसे प्रेम से सहला रहे थे. जब ध्रुव वहाँ पहुँचा, तो उसका मन भी पिता की गोद में बैठने के लिए मचल उठा. वह भी जाकर अपने पिता की गोद में बैठ गया. उसी समय रानी सुरुचि वहाँ पहुँच गई. उसने जब ध्रुव को अपने पिता उत्तानपाद की गोद में बैठा देखा, तो चिढ़ गई और खींचकर ध्रुव को गोद से उतार दिया. फिर अपने कटु वचन से ध्रुव को आहत करते हुए बोली, “अपने पिता की गोद और इस राज्य के सिंहासन पर बैठने का अधिकार केवल मेरे पुत्र उत्तम का है.” स...